शिव पुराण का सावन में पाठ
सावन
मास भगवान शिव को बहुत प्रिय है। सावन माह भगवान शिव को समर्पित है। इस माह में
भगवान शिव की बड़े धूमधाम से पूजा की जाती है।
सावन में शिव पुराण का पाठ
करना चाहिए। सावन में
शिव पुराण के पाठ का बहुत महत्व है। शिव पुराण के पाठ से व्यक्ति के जीवन में
खुशहाली का आगमन होता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इससे जीवन में शांति, संतुलन और संयम आता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव पुराण का श्रवण करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्त को
कष्टों से मुक्ति प्रदान करते हैं।
भगवान
शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवपुराण का पाठ बहुत जरूरी है।
शिवपुराण
भाग 3
रुद्र संहिता
रुद्र
संहिता
रुद्र
संहिता हिन्दू धर्म
के प्रमुख पुराणों में से एक, शिव महापुराण की सबसे महत्वपूर्ण और विशाल संहिता है। इसमें भगवान शिव के चरित्र, उनके विवाह, अवतारों और लीलाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है।
रुद्र
संहिता को कुल ५ खण्डों
(भागों) में विभाजित
किया गया है, जिनका विवरण
इस प्रकार है:
१. सृष्टि
खण्ड (प्रथम खण्ड)
- विषय: ब्रह्मांड की उत्पत्ति और त्रिदेवों का
प्राकट्य।
- मुख्य प्रसंग: इसमें नारद जी का मोह, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी की उत्पत्ति, तथा भगवान शिव द्वारा सृष्टि के संचालन की विधि
का वर्णन है। इसमें कुल २० अध्याय हैं।
२. सती खण्ड
(द्वितीय खण्ड)
- विषय: माता सती का जीवन और उनका त्याग।
- मुख्य प्रसंग: दक्ष पुत्री माता सती का जन्म, शिव जी से उनका विवाह, दक्ष यज्ञ का प्रसंग और सती का योगाग्नि में
भस्म होना। इसमें कुल ४२ से ४३ अध्याय हैं।
३. पार्वती
खण्ड (तृतीय खण्ड)
- विषय: माता पार्वती का पुनर्जन्म और तपस्या।
- मुख्य प्रसंग: माता सती का हिमालय और मैना की पुत्री के रूप में जन्म लेना, शिव जी को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या, और शिव-पार्वती विवाह का पावन चरित्र। इसमें ५५
अध्याय हैं।
४. कुमार
खण्ड (चतुर्थ खण्ड)
- विषय: शिव-पार्वती के पुत्रों की कथाएँ।
- मुख्य प्रसंग: भगवान कार्तिकेय (कुमार) का जन्म, तारकासुर का वध, देवताओं की रक्षा और भगवान श्री गणेश के जन्म
तथा उनके विवाह की कथा।
५. युद्ध
खण्ड (पंचम खण्ड)
- विषय: धर्म की स्थापना के लिए दिव्य युद्ध।
- मुख्य प्रसंग: भगवान शिव द्वारा अधर्मी राक्षसों का संहार, विशेषकर त्रिपुरासुर वध (जिसके बाद वे त्रिपुरारी कहलाए) और जलंधर जैसी
महाशक्तियों के वध की कथा।
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